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लोक सभा अध्यक्ष ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया

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भुवनेश्वर, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को विधिनिर्माताओं से राष्ट्रहित के मुद्दों पर दलगत भावना से ऊपर उठकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसद और विधानमंडलों में बैठकों की संख्या कम होना तथा सदस्यों का अमर्यादित आचरण लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंता का विषय है।

भुवनेश्वर, ओडिशा में संसद और राज्य विधानमंडलों की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के सभापतियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए बिरला ने कहा कि संविधान की मूल भावना सामाजिक न्याय और अवसर की समानता पर आधारित है और यही भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की दिशा तय करती रही है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर का यह विजन आज भी भारत की प्रगति का मार्गदर्शन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दशकों में इस विजन को ठोस रूप दिया गया है, जिसके चलते अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय से जुड़े लोग देश के राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे सर्वोच्च पदों पर आसीन हुए हैं। यह भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता और समावेशिता का प्रमाण है।

बिरला ने इस अवसर पर कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी धन के पारदर्शी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही वंचित वर्गों तक विकास का लाभ पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा सशक्तिकरण केवल वित्तीय सहायता से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और अवसरों की बराबरी से ही संभव है।

समितियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि वे संसदीय लोकतंत्र का मूल आधार हैं। सदन की राजनीतिक बाधाओं से इतर समितियां गहन विचार-विमर्श करती हैं और आम सहमति से सिफारिशें प्रस्तुत करती हैं। विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समितियां योजनाओं की प्रगति और बजटीय प्रावधानों की समीक्षा करती हैं तथा सरकार को जवाबदेह बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि समितियों के प्रतिवेदन न केवल सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हैं बल्कि नीति निर्धारण में भी ठोस योगदान देते हैं। यही कारण है कि इन समितियों की भूमिका समय के साथ और अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि भुवनेश्वर सम्मेलन से सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में नई रणनीतियां सामने आएंगी।

इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश तथा संसदीय समिति के सभापति डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी संबोधन किया।

उद्घाटन सत्र में ओडिशा विधान सभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने स्वागत भाषण दिया जबकि उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन का विषय अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण, विकास और सशक्तीकरण में संसद तथा राज्य विधानमंडलों की समितियों की भूमिका रखा गया है।

सम्मेलन का समापन 30 अगस्त को ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति के विदाई भाषण से होगा।

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(Udaipur Kiran) / सुशील कुमार

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