नई दिल्ली: डिफेंस सेक्टर की प्राइवेट कंपनी Apollo Micro Systems Ltd के स्टॉक में शुक्रवार को तेज़ी देखने को मिली. जिससे स्टॉक ने अपने ऑल टाइम हाई लेवल को टच कर लिया, जो कि 271.40 रुपये है. ख़बर लिखे जाने तक भी कंपनी के शेयर 8 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी के साथ 262 रुपये के लेवल पर ट्रेड कर रहे थे. यह तेज़ी इसलिए देखने को मिल रही है क्योंकि कंपनी ने बताया है कि उसे मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (एमआईजीएम) - विघाना नामक डिफेंस इक्विपमेंट प्रोडक्ट बनाने के लिए डीआरडीओ से मंजूरी मिल गई है. बता दें कि पिछले 5 साल में स्टॉक ने अपने निवेशकों को 1927 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है.
कंपनी को मिली मंजूरीकंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि डीआरडीओ के डीसीपीपी ने उसे मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (एमआईजीएम) - विघाना के प्रोडक्शन के लिए मंजूरी दे दी है. कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में यह भी बताया कि उसने NASM-SR मिसाइल में इस्तेमाल होने वाले ओमनी-डायरेक्शनल मल्टी-EFP वारहेड बनाने के लिए आवश्यक तकनीक प्राप्त करने हेतु DRDO के साथ एक समझौते पर साइन भी किए हैं.
कंपनी का क्वार्टर रिजल्टजून तिमाही में, अपोलो माइक्रोसिस्टम्स का रेवेन्यू 46% बढ़कर 133.5 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 91.2 करोड़ रुपये था. टैक्स के बाद इसका प्रॉफिट भी दोगुने से ज़्यादा बढ़कर 17.6 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.4 करोड़ रुपये था.
कंपनी ने कहा कि यह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ पहला तिमाही प्रदर्शन है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उसने अपने मौजूदा ऑर्डरों को कुशलतापूर्वक पूरा किया तथा कई हाई-वैल्यू सिस्टम को सुचारू रूप से प्रोडक्शन में लगाया.
पहली तिमाही में कंपनी की कुल इनकम 46.49% बढ़कर 134.45 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 91.78 करोड़ रुपये थी.
FII और DII दोनों बुलिशकंपनी में एफआईआई और डीआईआई दोनों अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ट्रेंडलाइन के मुताबिक, एफआईआई ने जून 2025 तिमाही में अपनी हिस्सेदारी को 0.93% से बढ़ाकर 7.16% कर दिया है.
वहीं डीआईआई ने कंपनी में हिस्सेदारी को बढ़ाया है. ट्रेंडलाइन के मुताबिक, जून 2025 तक कंपनी में डीआईआई के पास 1.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी.
कंपनी को मिली मंजूरीकंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि डीआरडीओ के डीसीपीपी ने उसे मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (एमआईजीएम) - विघाना के प्रोडक्शन के लिए मंजूरी दे दी है. कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में यह भी बताया कि उसने NASM-SR मिसाइल में इस्तेमाल होने वाले ओमनी-डायरेक्शनल मल्टी-EFP वारहेड बनाने के लिए आवश्यक तकनीक प्राप्त करने हेतु DRDO के साथ एक समझौते पर साइन भी किए हैं.
कंपनी का क्वार्टर रिजल्टजून तिमाही में, अपोलो माइक्रोसिस्टम्स का रेवेन्यू 46% बढ़कर 133.5 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 91.2 करोड़ रुपये था. टैक्स के बाद इसका प्रॉफिट भी दोगुने से ज़्यादा बढ़कर 17.6 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8.4 करोड़ रुपये था.
कंपनी ने कहा कि यह उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ पहला तिमाही प्रदर्शन है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उसने अपने मौजूदा ऑर्डरों को कुशलतापूर्वक पूरा किया तथा कई हाई-वैल्यू सिस्टम को सुचारू रूप से प्रोडक्शन में लगाया.
पहली तिमाही में कंपनी की कुल इनकम 46.49% बढ़कर 134.45 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 91.78 करोड़ रुपये थी.
FII और DII दोनों बुलिशकंपनी में एफआईआई और डीआईआई दोनों अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ट्रेंडलाइन के मुताबिक, एफआईआई ने जून 2025 तिमाही में अपनी हिस्सेदारी को 0.93% से बढ़ाकर 7.16% कर दिया है.
वहीं डीआईआई ने कंपनी में हिस्सेदारी को बढ़ाया है. ट्रेंडलाइन के मुताबिक, जून 2025 तक कंपनी में डीआईआई के पास 1.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी.
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